Posts

Showing posts from June, 2023

फुलवारी हैं बेटियां

    फुलवारी हैं बेटियां आज दूर क्षितिज में, उन्मुक्त पंछियों की तरह, अनवरत उड़ान, भरती हैं बेटियां। कठिन और श्रमसाध्य, समझी जाने वाली। दुरूह और दुष्कर राहों को, सुगम बनाती हैं बेटियां। घरों को ही नहीं, संसार को भी, मंदिर की तरह,       सजा-संवारकर पूजा के लायक, बनाती हैं बेटियां। जिस घर में बेटी न हो वो घर सूना-सूना रहता है बेटे हैं फूल तो फुलवारी हैं बेटियां। फुलवारी हैं बेटियां।      --00—                                                             --   दया शंकर मिश्र, “ सागर ”             ...

नर और नारी

Image
 

कर्ज चुकता

  कर्ज चुकता   दया शंकर मिश्र, आशुलिपिक, NSI, कानपुर         विवाह के दस वर्ष उपरांत जय के घर में किलकारियां गूंजी तो जय और जय के माता-पिता की खुशी का पारावार न रहा। इन दस वर्षों में जय और उसकी पत्नी राधा ने न जाने कितनी मन्नतें मानी थीं और कितने देवी-देवताओं के दर पर मत्था टेका था। गांव की औरतें अकसर जय की मां से उलाहना जैसे देतीं और कहतीं-सुधा तुम्हारी बहू में ही कोई कमी है, वरना इसके साथ जिनके हाथ पीले हुये थे, उनके दो-दो बच्चे हैं। हंसता-खेलता परिवार कई बार इस प्रकार के तानों से परेशान हो जाता। हालांकि वे स्वयं किसी से कुछ नहीं कहते थे, उन्हें भगवान के न्याय पर पूरा भरोसा था। वे मानते थे कि एक दिन उनकी बगिया में सुंदर पुष्प अवश्य खिलेगा।       दिन-महीने-साल इसी प्रत्याशा में बीतते रहे और उसकी परिणतिस्वरूप आज मीठा फल मिला था। सुधा के अतीत के चलचित्र में सारी तस्वीरें घूम रही थीं। वह खाका खींच रही थी भविष्य के तानों-बानों का। मुन्ने का क्या नाम रखना होगा, कौन-...

प्यार में छली गई

प्यार में छली गई इश्क का क्या मतलब होता है ? प्यार में क्या ये सब होता है ? इश्क जब मुझसे ही करते हो, दुनिया से फिर क्यों डरते हो ? करलो मुझसे शादी आज, रहे न बीच में कोई राज। प्यार को मैने पूजा है, तुम इश्क कमीना कहते हो। मैं इश्कन-इश्कन होती हूं, तुम दूर-दूर क्यों रहते हो ? आज ये मैने जाना है, प्यार तो एक बहाना है। मकसद मुझे फंसाना है। मैं भी कितनी भोली हूं, जो अब तक तुम्हें न जाना है। तुमको ही अपना प्रीतम और अपना सब कुछ माना है। खेल तुम्हारा खत्म हुआ, करती हूं मैं रब से दुआ। तुम जैसा ना मीत मिले, विरह मिले, ना प्रीत मिले। --0--