मेरा गांव और शहर
मेरा गांव और शहर दो कदम तुम भी बढ़ो, दो कदम हम भी बढ़ें दो-दो कदम बढ़ने से फासला घट जाता है। ये मेर ा गांव वाला दिल है, शहर वाला नहीं ऐ दोस्त, दो बोल प्यार के सुन, खुशी से भर जाता है। कुछ भी न दो ठीक है, दुत्कारो, भगाओ तो नहीं, क्योंकि ऐसा करने से दिल भर आता है। चाहे मान ना दो, बात तो मान की करो, ...