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पत्नी चालीसा
पत्नी चालीसा मेरा एक दोस्त, जिसकी हाल ही में शादी हुई थी, लोगों के कथनानुसार उसकी बर्बादी हुई थी, घर में सुख-शांति कैसे बरकरार रहे इसके स्वानुभूत उपाय बतला रहा था। पत्नी, साली, साले, सास-ससुर को कैसे वश में किया , सच्ची-सच्ची घटना सुना रहा था। कह रहा था-सुबह, शाम, आठों याम, पूरे मन से पत्नी चालीसा पढ़ा करो। घर में कोई विघ्न-बाधा नहीं आयेगी, अगर आई भी तो पत्नी उसको स्वयं निपटायेगी। साला,साली औ घरवाली, इनको किसी देव से कम न मानो अगर भूल से भी इनके खिलाफ कुछ कह दिया तो उस दिन शाम को उपवास पक्का जानो। घर में रूस और यूक्रेन सा बेमियादी युद्ध छिड़ जायेगा, तुम्हारा पूरा परिवार गंगाजल सा शुद्ध हो जायेगा। अगर तुमने मेरी बातों पर अमल नहीं किया तो, सच कहता हूं तू भी एक दिन बुद्ध हो जायेगा। जिसका गृहमंत्रालय जितना सख्त है, उसकी हालत आफिस में, उतनी ही पस्त है। चाहे घर का हो या केंद्र का, दोनों से लोगों की हवा खराब है। इसलिये बेहतरी इसी में है कि अपनी इज्जत बचा के रखो, पता नहीं कब उतर जाये मेरे अजीज दोस्त, मेरी मानो, पत्न...
पत्नी संग कुंभ स्नान
पत्नी संग महाकुंभ स्नान मैं महाकुंभ नहाने जा रहा था, कि श्रीमती जी बिना कहे तैयार हो गईं। मैं और मेरे मित्र कार में बैठे थे, श्रीमती जी जबरदस्ती साथ में सवार हो गईं। कहने लगीं-संगम स्नान का महत्व तभी है, जब अपनी धर्मपत्नी साथ में डुबकी लगाये। मुझे साथ नहीं ले जाओगे, तो पता नहीं किसके साथ गंगा नहाओगे। इसलिये मैं तुम्हारे साथ चल रही हूं, इन दिनों तुम्हारा विशेष खयाल रख रही हूं। कुंभनगरी में जाकर खूब घूमा, स्नान किया। जगह-जगह जाकर संतामृत पान किया। एक संतजी बड़े भले लगे, हम तीनों उनकी कथा ध्यान से सुनने लगे। संतजी बोले, ये दुनिया फानी है, मानव बुलबुला है, दो दिन की जिंदगानी है। पैसा-रूपया तो हाथ की मैल है, उसके पीछे दौड़े जो, समझो कि बैल है। मैने कहा धन्य हो स्वामीजी, ये बात मेरी घरवाली को भी समझाइये। दो-चार अच्छी चीजें इनके हृदय में जगाइये। संतजी बोलते उससे पहले ही श्रीमती जी बोलीं , अपनी जगह से थोड़ा इधर-उधर डोलीं। बोलीं घर चलकर तुम्हारी सारी मैल उतार दूंगी। उस मैल को अपने भाई को उधार दूंगी। तुम संतजी के चेले हो, वैसे भी बड़े अलबेले ...

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