पत्नी चालीसा

 


 पत्नी चालीसा

 

मेरा एक दोस्त, जिसकी हाल ही में शादी हुई थी,

लोगों के कथनानुसार उसकी बर्बादी हुई थी,

घर में सुख-शांति कैसे बरकरार रहे

इसके स्वानुभूत उपाय बतला रहा था।

पत्नी, साली, साले, सास-ससुर को कैसे वश में किया, सच्ची-सच्ची घटना सुना रहा था।

कह रहा था-सुबह, शाम, आठों याम, पूरे मन से पत्नी चालीसा पढ़ा करो।

घर में कोई विघ्न-बाधा नहीं आयेगी, अगर आई भी तो पत्नी उसको स्वयं निपटायेगी।

साला,साली औ घरवाली, इनको किसी देव से कम न मानो

अगर भूल से भी इनके खिलाफ कुछ कह दिया तो

उस दिन शाम को उपवास पक्का जानो।

घर में रूस और यूक्रेन सा बेमियादी युद्ध छिड़ जायेगा,

तुम्हारा पूरा  परिवार गंगाजल सा शुद्ध हो जायेगा।

अगर तुमने मेरी  बातों पर अमल नहीं किया तो,

सच कहता हूं तू भी एक दिन बुद्ध हो जायेगा।

जिसका गृहमंत्रालय जितना सख्त है, उसकी हालत आफिस में, उतनी ही पस्त है।

चाहे घर का हो या केंद्र का, दोनों से लोगों की हवा  खराब है।

इसलिये बेहतरी इसी में है कि अपनी इज्जत बचा के रखो, पता नहीं कब उतर जाये

मेरे अजीज दोस्त, मेरी मानो, पत्नी चालीसा और पत्नी पुराण पूर्ण मनोयोग से पढ़ो

और जिंदगी की जंग में अपनी पत्नी को आगे कर,

हर बाधाओं को पार कर निरंतर आगे बढ़ो।।

                 --00—  दया शंकर मिश्र सागर,

                             राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, कानपुर

                             मो. 9415429279

 

 

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