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प्रभू में मन लगाइये

 हंसिये जरा सा और जरा सा मुस्कुराइये, आप सबसे श्रेष्ठ हैं अब तो खिलखिलाइये। जिंदगी उधार की है, ब्याज तो चुकाइये, थाेड़ा भक्ति कीजिये और थोड़ा गुनगुनाइये। आप सबसे.. है हमारा भाग जो हम-आप साथ-साथ हैं, घूमते इधर-उधर डाले हाथ-हाथ हैं। प्रभु को साधुवाद दें और शीश को झुकाइये। आप सबसे.. आप संग श्री है औ पास श्री मति भी है, श्री को औ मति को सबकी वृद्धि में  लगाइये। आप सबसे.. सबका साथ मंत्र है, इसी से अपना तंत्र है, तंत्र और मंत्र को इक पटल पे लाइये। आप सबसे.. निज की भावना में हित, निहित नहीं कभी हुआ, थोड़ा स्वार्थ छोड़िये औ पर में मन लगाइये। आप सबसे.. हम कहां रोज-रोज आप संग विचरते  हैं, आइये मिलिये गले और प्रेमरंग लगाइये। आप सबसे.. राग,द्वेष,ईर्ष्या को परे हटा मिलें गले, हो सके तो होली में बुराई भी जलाइये। आप सबसे.. द्वन्द्व मन में चल रहा औ जग में चल रहा है युद्ध, मोदीजी अब आप ही पुतिन को समझाइये। आप सबसे.. थोड़े लफड़े छोड़िये, किसी का दिल न तोड़िये, बुद्धि अपनी शुद्धि कर प्रभू में मन रमाइये। आप सबसे..

सुराज की कीमत

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                                                          सुराज की कीमत     पढ़ो-लिखो, कुछ अच्छा करके नाम कमाओ, जग में आये हो तो जग में तुम छा जाओ। याद रखेगी दुनिया उनको, जो अच्छा करते हैं। आज ठोककर छाती बोलो, देश पे हम मरते हैं। जब लाल,बाल और पाल हमारे नायक  हो जायेंगें। भगत सिंह, आजाद को बोलो, भुला नहीं पायेंगें। पेट की खातिर जीते जो वो श्वान हुआ करते हैं। मन में जिसके हो देशप्रेम, भगवान हुआ करते हैं। सोचो,करो,विचारो जिससे, जग में जीवन व्यर्थ न जाये, तुम्हें बुलाने आने पर यम भी शर्मा जाये। उन वीरों को कोटि नमन, हम आज सभी करते हैं, जिनकी कुर्बानी के दम पर हम आज सुराज करते हैं। --0—                             दया शंकर मिश्र ‘ सागर ’        ...

राजा की कातिल

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प्रेम - जीवन का सार है

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पत्नी चालीसा

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    पत्नी चालीसा   मेरा एक दोस्त, जिसकी हाल ही में शादी हुई थी, लोगों के कथनानुसार उसकी बर्बादी हुई थी, घर में सुख-शांति कैसे बरकरार रहे इसके स्वानुभूत उपाय बतला रहा था। पत्नी, साली, साले, सास-ससुर को कैसे वश में किया , सच्ची-सच्ची घटना सुना रहा था। कह रहा था-सुबह, शाम, आठों याम, पूरे मन से पत्नी चालीसा पढ़ा करो। घर में कोई विघ्न-बाधा नहीं आयेगी, अगर आई भी तो पत्नी उसको स्वयं निपटायेगी। साला,साली औ घरवाली, इनको किसी देव से कम न मानो अगर भूल से भी इनके खिलाफ कुछ कह दिया तो उस दिन शाम को उपवास पक्का जानो। घर में रूस और यूक्रेन सा बेमियादी युद्ध छिड़ जायेगा, तुम्हारा पूरा   परिवार गंगाजल सा शुद्ध हो जायेगा। अगर तुमने मेरी   बातों पर अमल नहीं किया तो, सच कहता हूं तू भी एक दिन बुद्ध हो जायेगा। जिसका गृहमंत्रालय जितना सख्त है, उसकी हालत आफिस में, उतनी ही पस्त है। चाहे घर का हो या केंद्र का, दोनों से लोगों की हवा   खराब है। इसलिये बेहतरी इसी में है कि अपनी इज्जत बचा के रखो, पता नहीं कब उतर जाये मेरे अजीज दोस्त, मेरी मानो, पत्न...

पत्नी संग कुंभ स्नान

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पत्नी संग महाकुंभ स्नान           मैं महाकुंभ नहाने जा रहा था, कि श्रीमती जी बिना कहे तैयार हो गईं। मैं और मेरे मित्र कार में बैठे थे, श्रीमती जी जबरदस्ती साथ में सवार हो गईं। कहने लगीं-संगम स्नान का महत्व तभी है, जब अपनी धर्मपत्नी साथ में डुबकी लगाये। मुझे साथ नहीं ले जाओगे, तो पता नहीं किसके साथ गंगा नहाओगे। इसलिये मैं तुम्हारे साथ चल रही हूं, इन दिनों तुम्हारा विशेष खयाल रख रही हूं। कुंभनगरी में जाकर खूब घूमा, स्नान किया। जगह-जगह जाकर संतामृत पान किया। एक संतजी बड़े भले लगे, हम तीनों उनकी कथा ध्यान से सुनने लगे। संतजी बोले, ये दुनिया फानी है, मानव बुलबुला है, दो दिन की जिंदगानी है। पैसा-रूपया तो हाथ की मैल है, उसके पीछे दौड़े जो, समझो कि बैल है। मैने कहा धन्य हो स्वामीजी, ये बात मेरी घरवाली को भी समझाइये। दो-चार अच्छी चीजें इनके हृदय में जगाइये। संतजी बोलते उससे पहले ही श्रीमती जी बोलीं , अपनी जगह से थोड़ा इधर-उधर डोलीं। बोलीं घर चलकर तुम्हारी सारी मैल उतार दूंगी। उस मैल को अपने भाई को उधार दूंगी। तुम संतजी के चेले हो, वैसे भी बड़े अलबेले ...

साली और मैं

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    साली और मैं एक बार आपनी साली को, मैने ज्यादा ही चिढ़ा दिया साली थी मेरी होशियार, उसने बहना को भिड़ा दिया तुमको दीदी, कुछ पता   भी है, जीजा   बाहर क्या करते हैं कहते हैं तुमसे करूं प्यार, लेकिन कविता पर मरते हैं। तुम इन पर नजर रखो वरना, एक दिन ऐसा  भी  आयेगा। तुम घर पर करवाचौथ रहो, बंदा ले कुड़ी उड़ जायेगा। इसलिये तुम्हें समझाती हूं, कविता   पर थोड़ी नजर रहे गंगा, यमुना, त्रिवेणी की फिर से न कोई रसधार बहे।। -     दया शंकर मिश्र “ सागर ” -     राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, कानपुर -     मो. 9415429279