साली और मैं

 




 

साली और मैं


एक बार आपनी साली को, मैने ज्यादा ही चिढ़ा दिया

साली थी मेरी होशियार, उसने बहना को भिड़ा दिया

तुमको दीदी, कुछ पता भी है, जीजा  बाहर क्या करते हैं

कहते हैं तुमसे करूं प्यार, लेकिन कविता पर मरते हैं।

तुम इन पर नजर रखो वरना, एक दिन ऐसा भी आयेगा।

तुम घर पर करवाचौथ रहो, बंदा ले कुड़ी उड़ जायेगा।

इसलिये तुम्हें समझाती हूं, कविता  पर थोड़ी नजर रहे

गंगा, यमुना, त्रिवेणी की फिर से न कोई रसधार बहे।।


-    दया शंकर मिश्र सागर

-    राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, कानपुर

-    मो. 9415429279

 

 

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