ईश्वरीय मदद
ईश्वरीय मदद
15 मई, 2023
की चिलचिलाती दोपहर की गर्मी वाले वाकये को मैं कैसे भूल सकती हूं। उस दिन मैं
अपने पति के साथ कार से उनके एक मित्र के घर रामादेवी गई थी। चूंकि दोनों लोग बहुत
दिनों के बाद मिले थे अतः काफी देर हम लोग बैठे रहे। तमाम दुनिया की बातें
करते-करते कब सुबह से दोपहर हो गयी पता ही नहीं चला। बातों के पिटारे खुलने लगे तो
उनका अंत ही नहीं हो रहा था। खाने-पीने के बाद जब उनके घर से रूखसत होने लगे तब
लगभग दो बज रहे थे। सूर्यदेव अपने प्रचंड वेग से धरती का ताप बढ़ा रहे थे। उनके घर
से बाहर निकलते ही भयंकर लू के थपेड़ों ने मुंह चूमकर हम लोगों का स्वागत किया। उन
लोगों के रोकने के बावजूद पतिदेव चलने को तैयार थे। आखिर हम लोग कल्याणपुर के लिये
निकल पड़े। बाहर खड़ी गाड़ी के अंदर का तापमान विचलित कर देने वाला था। कुछ देर तक
खिड़की खुली रखने के उपरांत ए.सी. ने काम करना शुरू किया तब राहत मिली।
झकरकटी बस
अड्डा आते-आते पतिदेव ने बताया कि गाड़ी का पिकअप बढ़ नहीं रहा है, लग रहा है कि
कुछ गड़बड़ होने वाला है। कुछ देर बाद हार्न बजना बंद हो गया और गाड़ी के डैशबोर्ड
से सारे सिगनल गायब हो गये। गाड़ी का स्टीयरिंग भी भारी (मैनुअल जैसे) हो गया। हम
लोग घबरा गये- हे भगवान इस गर्मी में अगर गाड़ी खराब हुई तो कहां मिस्त्री मिलेगा,
कैसे हम लोग घर पहुंचेंगें। इसी उहापोह में गाड़ी चलती रही। समझ में नहीं आ रहा था
कि क्या तकनीकी खराबी हो गयी। एक विचार मन में आ रहा था कि शायद बैट्री खराब हो
गयी है, क्य़ोंकि डैशबोर्ड में बीच-बीच में
बैट्री वीक का एक मैसेज चमक जाता था।
एक डर यह
लगने लगा कि अगर गाड़ी बंद हो गयी तो फिर चालू भी नहीं होगी। किसी तरह से
कल्याणपुर पहुंचें तो मिस्त्री को दिखाया जाय। सोचते-सोचते और चलते-चलते गाड़ी
विश्वविद्यालय से आगे आ गयी तभी दूसरे साइड से कट से मुड़कर एक कार अचानक मेरी कार
के सामने आ गयी। इन्होंने ब्रेक लगाया तो गाड़ी बंद हो गयी। किसी तरह से कार को
किनारे किया और भगवान का स्मरण करते हुये सोचा कि क्या होगा। इतने में पीछे से एक
आटोवाले सज्जन बिना मदद मांगे हम लोगों के पास आये। उस आटो में कोई सवारी नहीं थी,
केवल वही सज्जन थे। उन्होंने पतिदेव से कहा कि आप गाड़ी पर बैठो मैं पीछे से धक्का
लगाकर आपकी कल्याणपुर मिस्त्री के पास तक पहुंचा दूंगा। हां आप बीच में ब्रेक मत
लगाना वर्ना मुझे दिक्कत होगी। हम लोग कार में बैठे पीछे से वो देवतुल्य सज्जन
अपनी आटो से धक्का लगाते हुये चले। मुसीबत में निरंतर भगवान को स्मरण करते और उन
सज्जन को मन ही मन साधुवाद देते हुये हम लोग चले। बगिया क्रासिंग तक आते-आते एक
मोटरसाइकिल वाले को बचाने के चक्कर में ब्रेक लगाना प़ड़ा। गाड़ी रूकी। हम लोग
थोड़ा झुंझलाये, लेकिन पुनः वे बेचारे धक्का लगाते हुये चले। पतिदेव ने कहा कि आगे
गोबा गार्डेन क्रासिंग के पास मेरे एक परिचित बैट्री वालों की दुकान है और दूसरी
तरफ परिचित कार मैकेनिक सलीम भी है। मैं दोनों को फोन करके बुलवा लूंगा। आप बस
वहीं छोड़ दीजियेगा। पुनः उनकी आटो स्टार्ट हुई धक्का से चलती हुई गाड़ी गोबा
गार्डेन पहुंची। देखने वालों को लग रहा होगा कि भैंस को बकरी धक्का दे रही है। हम
लोग उतरे उनकी सहृदयता के लिये विनम्र कृतज्ञता व्यक्त करते हुये उनको कुछ
पारिश्रमिक देने की इच्छा व्यक्त की, लेकिन वे सज्जन कुछ लेने को तैयार नहीं हुये – सब भोले की माया
है- कहते हुये चले गये। हम लोग अवाक थे। उनका न तो पता, मोबाइल नं. या आटो नंबर
कुछ भी न पूछ और न नोट कर पाये। उनके जाने के बाद अहसास हुआ कि उनके बारे में कुछ
तो जानकारी रखनी थी। खैर वे जा चुके थे।
तब तक
बैट्री वाला बैट्री लेकर आ गया। उसने बोनट खोलकर बैट्री चेक किया तो बैट्री डेड
थी। इतनी देर में कार मिस्त्री सलीम भी आ गये। उन्होंने दूसरी बैट्री रखकर गाड़ी
स्टार्ट कर दिया और बताया कि गाड़ी का फाइन बेल्ट टूट जाने के कारण यह समस्यायें
हुई हैं। पतिदेव ने मिस्त्री को कार की चाबी दे दी और कहा कि आप अपनी दुकान पर कार
ले जाओ मैं बेटे को फोन करता हूं वो गड़रियनपुरवा से फाइन बेल्ट लेकर आ जायेगा। यह
सब होते-होते शाम के चार बज गये। सूर्यदेव की आभा कम हो गयी थी। हम लोग मानसिक और
शारीरिक रूप से थक चुके थे। किसी मित्र की गाड़ी लेकर इन्होंने मुझे घर छोड़ा और
फिर उनकी गाड़ी वापस करने आफिस चले गये। बेटा फाइन बेल्ट लेकर आया तो सायं 6.30
बजे तक गाड़ी बन पाई।
हम लोगों ने
भगवान का लाख-लाख शुक्र अदा किया कि उन्होंने हमारी परेशानी में अपने भक्त को
भेजकर हमारी मदद की तथा सही समय पर बैट्रीवाले और मिस्त्री आये। फाइनबेल्ट लग जाने
से नई बैट्री की मदद से कार स्टार्ट हो गयी और लगभग 15 मिनट में अल्टरनेटर से काम
लायक चार्ज भी हो गयी। उस दिन मुझे पुनः अपने बड़े-बूढ़ों तथा पुस्तकों में लिखी
बातें याद आईं कि – भगवान ने अपने भक्तों के प्रारब्ध में जो लिखा है वो कष्ट तो
देते हैं, लेकिन विपत्ति की तीव्रता को कम कर उसका निवारण भी करते हैं। बस आपकी उन
पर सच्ची आस्था होनी चाहिये।
--0—
रेखा मिश्रा,
पत्नी दया शंकर मिश्र,
एल.आई.जी.-50, फेज-2, महर्षि दयानंद विहार,
कल्याणपुर,
कानपुर-208026
आपको भी यदि कभी ईश्वरीय मदद मिली हो तो कृपया अपना अनुभव अवश्य साझा करें
ReplyDeleteअतिसुंदर, ईश्वर सब पे ऐसे ही कृपा बनाए रखे।
ReplyDelete