वन-संरक्षण
वन-संरक्षण
हरे-हरे वन काटो न भइया, यही तो अपनी जान हैं।
यही हैं सारे विश्व के रक्षक, इन्हीं से अपनी शान
है।
आम, आमला, महुआ, कहुआ, सब इनसे हम पाते।
वर्षा होती इनसे ही, हम गीत खुशी के गाते।।
जन्म से लेकर मृत्यु तलक, ये देते साथ हमारा।
पीपल, कीकर, शीशम, चंदन, महक रहा जग सारा।।
वंशी बनती इनसे ही, जिससे हम भरते तान हैं।
हरे-हरे....
तानपूरा, सारंगी औ हारमोनियम के ये दाता।
भक्त, भक्ति में डूबे जब भी, लिये वाद्य ये गाता।
देते हमको प्राणवायु ये, जिससे जान-जहान है।
हरे-हरे
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दया शंकर मिश्र “सागर”
NSI, KANPUR- 9415429279
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