हमारी प्यारी हिंदी
जन-जन की भाषा है हिंदी,
हम सबकी अभिलाषा हिंदी।
संस्कृत की ये सगी बहन है,
सबकी प्रत्याशा है हिंदी।। 1 ।।
एकसूत्र में बांध सके जो,
वह अद्भुत लासा है हिंदी।
चारधाम को जोड़नेवाली,
राज-काज की भाषा हिंदी।।2।।
हम सब मिलकर एक बनें,
नेक बनें कहती ये हिंदी।
श्री,शोभा औ सौख्य प्रवर्धक,
जनगणमन की भाषा हिंदी।।3।।
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दया शंकर मिश्र "सागर"
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