स्वामी ढपोरशंख
स्वामी ढपोरशंख
हमसे एक दिन मिलि गये, मि. सुघर, प्रवीन।
हंसकर बतलाने लगे, हैं सब विद्या हीन।।
हैं सब विद्या हीन, रात-दिन छाप रूपैया।
रस्ते में जो मिलें, कहें सब भैया-भैया।।
हेमामालिनि आके उनके तेल लगावैं।
श्रीदेवी औ तब्बू आके, गोड़ दबावैं।
कह स्वामी ढपोरशंख, ये सुख के दिन हैं।
"श्री" को सब चाहैं जग में, को "देवी" बिन है।।
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